October 29, 2026

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी हजारों लापता, जीवित बचे लोगों की उम्मीदें धुंधली

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हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर ढहने के बाद आई तबाही ने नेपाल को गहरे संकट में धकेला

काठमांडू | 2 सितंबर 2026

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन हजारों लापता लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने के बाद आई अचानक बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है।

रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। आशंका है कि कई लोग बाढ़ के साथ आए भारी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।

राहत अभियान जारी, लेकिन चुनौतियां बेहद बड़ी

बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। पहाड़ी इलाका, भारी मलबा और क्षतिग्रस्त सड़कें राहत एवं बचाव कार्य को और मुश्किल बना रही हैं।

लाखों टन मलबे ने बढ़ाई मुश्किलें

बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में चट्टानें, मिट्टी, बर्फ और अन्य मलबा लेकर आई। इससे कई गांवों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को गंभीर नुकसान पहुंचा।

विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक पहुंचना और मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश करना है।

अब राहत से पुनर्वास की ओर बढ़ रहा फोकस

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, सरकार और राहत एजेंसियों का ध्यान केवल बचाव अभियान तक सीमित नहीं रह गया है। प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बन गई है।

कई लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। ऐसे में भीड़भाड़, दूषित पानी और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन पर फिर उठे सवाल

नेपाल और चीन के हिमालयी क्षेत्रों में हुई इस त्रासदी ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों से जुड़ी आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।

यह आपदा केवल नेपाल के लिए नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।

प्रभावित परिवारों के लिए इंतजार का दौर

राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों में हजारों परिवार अपने लापता परिजनों के बारे में किसी खबर का इंतजार कर रहे हैं।

हर गुजरते दिन के साथ जीवित बचे लोगों को खोजने की उम्मीद कमजोर हो रही है, लेकिन बचाव दल अभी भी अभियान जारी रखे हुए हैं।

नेपाल के सामने अब दोहरी चुनौती है—पहली, लापता लोगों की तलाश और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना; दूसरी, बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण करना।

नेपाल की यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक और जलवायु संबंधी खतरों की गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है।

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