September 13, 2026

NBFC ने RBI से की बड़ी मांग, Revolving Credit पर रोक से छोटे कारोबारियों की बढ़ सकती है परेशानी

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नई दिल्ली: छोटे कारोबारियों और MSME सेक्टर के लिए लोन से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। देश की NBFC कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था Finance Industry Development Council (FIDC) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से Revolving Credit को लेकर प्रस्तावित पाबंदियों पर दोबारा विचार करने की मांग की है।

दरअसल, RBI ने NBFCs के लिए जारी किए जाने वाले क्रेडिट से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत NBFCs को मुख्य रूप से Term Loan देने की अनुमति होगी, जबकि Revolving Credit जैसे उत्पादों पर रोक लगाने की बात कही गई है। Credit Card जारी करने के लिए अधिकृत NBFCs को इस प्रस्तावित प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।

आखिर Revolving Credit होता क्या है?

इसे आसान भाषा में समझिए।

मान लीजिए किसी छोटे कारोबारी को ₹10 लाख की Credit Limit मिली। उसे पूरे ₹10 लाख एक साथ इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। वह जरूरत के समय ₹3 लाख निकाल सकता है, फिर पैसा वापस जमा करने पर उपलब्ध सीमा दोबारा इस्तेमाल कर सकता है।

यानी कारोबारी को हर बार नए लोन के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसी तरह की सुविधा को आम तौर पर Revolving Credit कहा जाता है।

छोटे कारोबारियों के लिए यह सुविधा खास तौर पर Working Capital की जरूरत पूरी करने में मददगार हो सकती है।

RBI क्यों कर रहा है नियमों में बदलाव?

RBI की चिंता मुख्य रूप से बार-बार इस्तेमाल होने वाले क्रेडिट और बढ़ते कर्ज के जोखिम को लेकर है।

Revolving Credit में ग्राहक एक तय सीमा के भीतर बार-बार पैसा इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में अगर ग्राहक लगातार उधार लेता रहे और समय पर भुगतान न करे, तो उस पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।

इसी तरह के जोखिम को ध्यान में रखते हुए RBI ने अपने Draft Rules में NBFCs के Revolving Credit Products को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि, यह अभी प्रस्ताव है, अंतिम नियम नहीं। RBI ने इस प्रस्ताव पर stakeholders से feedback भी मांगा था।

NBFC कंपनियां क्यों कर रही हैं विरोध?

NBFC सेक्टर की संस्था FIDC का कहना है कि Revolving Credit पर पूरी तरह रोक लगाने से सबसे ज्यादा असर उन छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है जिन्हें बैंकों से Working Capital की सुविधा आसानी से नहीं मिलती।

Reuters के अनुसार, FIDC ने RBI से कहा है कि ऐसी blanket restriction से NBFCs की trade और working-capital finance देने की क्षमता कम हो सकती है। इससे खासकर Micro, Small and Medium Enterprises यानी MSMEs के लिए फंडिंग मुश्किल और महंगी हो सकती है।

FIDC ने यह भी सुझाव दिया है कि पूरी तरह रोक लगाने के बजाय ऐसे नियम बनाए जाएं जिनसे ग्राहक की सुरक्षा भी बनी रहे और छोटे कारोबारियों को जरूरी Working Capital भी मिलता रहे।

छोटे कारोबारियों पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर प्रस्तावित नियम बिना बदलाव के लागू होते हैं, तो छोटे कारोबारियों के लिए फंडिंग का तरीका बदल सकता है।

आज कई कारोबारी अचानक आने वाली जरूरतों—जैसे कच्चा माल खरीदना, सप्लायर का भुगतान करना या रोजमर्रा के कारोबार का खर्च चलाना—के लिए Flexible Credit का इस्तेमाल करते हैं।

अगर ऐसी सुविधा सीमित हो जाती है, तो उन्हें हर जरूरत के लिए अलग Term Loan लेना पड़ सकता है।

NBFC उद्योग का मानना है कि इससे कागजी प्रक्रिया, समय और borrowing cost बढ़ सकती है। खासकर छोटे कारोबारियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

RBI और NBFC के बीच असली मुद्दा क्या है?

इस पूरे मामले में दोनों पक्षों की चिंता अलग-अलग है।

RBI की चिंता:
ग्राहक जरूरत से ज्यादा कर्ज में न फंसे और क्रेडिट सिस्टम में जोखिम नियंत्रित रहे।

NBFC सेक्टर की चिंता:
छोटे कारोबारियों और MSMEs को मिलने वाली आसान और Flexible Working Capital सुविधा अचानक बंद या सीमित न हो जाए।

यानी असली चुनौती यह है कि ग्राहक को सुरक्षित रखते हुए कारोबार के लिए जरूरी क्रेडिट की सुविधा भी बनी रहे।

अभी क्या होगा?

फिलहाल इसे RBI का Final Ban समझना सही नहीं होगा। मामला अभी प्रस्ताव और regulatory consultation के स्तर पर है। NBFC industry ने अपने सुझाव RBI के सामने रखे हैं और अब आगे RBI इन सुझावों पर विचार करके अंतिम नियम तय कर सकता है।

MSME सेक्टर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

भारत में लाखों छोटे कारोबारी अपने रोजमर्रा के कारोबार के लिए Working Capital पर निर्भर हैं। ऐसे में NBFC से मिलने वाले Flexible Credit के नियमों में बदलाव का असर सिर्फ वित्तीय कंपनियों पर नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों, MSMEs और उनके कारोबार की नकदी व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

अब देखना होगा कि RBI अंतिम नियम बनाते समय कर्ज के जोखिम और छोटे कारोबारियों की जरूरत—दोनों के बीच कितना संतुलन बनाता है।

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स्रोत: Reuters | अन्य सार्वजनिक वित्तीय रिपोर्टों के आधार पर

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