September 12, 2026

6 साल बाद दिशा सालियान मौत मामले में बड़ा मोड़, बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI जांच का दिया आदेश

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CBI को FIR दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश; कोर्ट ने कहा—पर्याप्त सबूत के बिना किसी को आरोपी न माना जाए

मुंबई | 2 सितंबर 2026 | देशहित भारत

दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने CBI को सतीश सालियान की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने और मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने से पहले किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा।

आखिर क्या है पूरा मामला?

दिशा सालियान, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। उनकी मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक आवासीय इमारत से गिरने के बाद हुई थी।

उस समय मुंबई पुलिस ने मामले में Accidental Death Report (ADR) दर्ज की थी। पुलिस का कहना था कि जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

अब दिशा के पिता सतीश सालियान ने मामले की जांच को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था।


सतीश सालियान ने क्या आरोप लगाए?

दिशा सालियान के पिता ने अपनी याचिका में अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने CBI जांच की मांग की और अपनी याचिका में कुछ व्यक्तियों के खिलाफ आरोप लगाए, जिनमें शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का नाम भी शामिल था।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि—

ये आरोप याचिकाकर्ता की तरफ से लगाए गए हैं और अभी किसी अदालत या जांच एजेंसी ने इन्हें साबित नहीं किया है।

हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा है कि पर्याप्त जांच सामग्री मिलने तक किसी को आरोपी नहीं माना जा सकता।


हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?

बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने CBI को मामले की जांच करने का निर्देश दिया।

कोर्ट के आदेश के अनुसार:

  • CBI मामले में FIR दर्ज करेगी।
  • सतीश सालियान का बयान दर्ज किया जाएगा।
  • जांच के लिए एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
  • मुंबई पुलिस मामले से जुड़े रिकॉर्ड CBI को सौंपेगी।
  • जांच में पर्याप्त सामग्री मिलने पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
  • यदि कोई संज्ञेय अपराध सामने नहीं आता है, तो CBI उचित closure proceedings दाखिल कर सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि FIR दर्ज करने का आदेश किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि या अपराध साबित होने के बराबर नहीं है।


आदित्य ठाकरे का नाम क्यों आया?

सतीश सालियान ने अपनी याचिका में आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए थे और FIR दर्ज करने की मांग की थी।

मामले में आदित्य ठाकरे की ओर से पेश वकील ने इन आरोपों का विरोध किया और याचिका को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस की ओर से भी अदालत में कहा गया कि पहले की जांच में हत्या के आरोप में किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूत सबूत नहीं मिले थे।

इसलिए इस मामले में यह कहना गलत होगा कि किसी व्यक्ति को दोषी साबित कर दिया गया है।

अभी तक किसी को दोषी नहीं ठहराया गया

यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

⚠️ CBI जांच का आदेश = किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं।

CBI अब मामले की जांच करेगी और उपलब्ध रिकॉर्ड, सबूत तथा परिस्थितियों की जांच करेगी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जांच अधिकारी के पास पर्याप्त सामग्री आने से पहले किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए।


6 साल बाद फिर क्यों चर्चा में आया मामला?

दिशा सालियान की मौत जून 2020 में हुई थी। इसके कुछ दिनों बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला भी सामने आया था।

दोनों मामलों को लेकर लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा और कई तरह की अटकलें होती रही हैं।

लेकिन अब दिशा सालियान मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच को नया मोड़ मिला है।

CBI की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि:

  • दिशा सालियान की मौत किन परिस्थितियों में हुई?
  • क्या मामले में कोई आपराधिक पहलू था?
  • पहले की जांच में कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट गया था या नहीं?
  • क्या उपलब्ध रिकॉर्ड और सबूत किसी अपराध की ओर संकेत करते हैं?

इन सवालों का अंतिम जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा।


अब आगे क्या होगा?

अब CBI मामले से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू करेगी।

जांच के बाद दो स्थितियां हो सकती हैं:

1️⃣ अगर किसी संज्ञेय अपराध के सबूत मिलते हैं

तो CBI कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई और रिपोर्ट/चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

2️⃣ अगर अपराध के पर्याप्त सबूत नहीं मिलते

तो CBI संबंधित अदालत के सामने उचित closure report दाखिल कर सकती है।

सतीश सालियान को ऐसी रिपोर्ट के खिलाफ कानूनी आपत्ति दर्ज करने की स्वतंत्रता भी दी गई है।


देशहित भारत की बात

दिशा सालियान मामला बेहद संवेदनशील है।

इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और कानूनी रूप से साबित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।

CBI जांच का आदेश निश्चित रूप से मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी कहना सही नहीं होगा।

अब सबकी नजर CBI जांच पर रहेगी।

क्या छह साल पुराने इस मामले से जुड़े सवालों का जवाब अब सामने आएगा?

इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा।

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