भारत की रक्षा ताकत में बड़ा उछाल: 2014 के बाद चार गुना बढ़ा डिफेंस प्रोडक्शन, अब दुनिया की नजर भारत पर
नई दिल्ली: भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि तेजी से दुनिया के लिए रक्षा उपकरण बनाने और निर्यात करने वाला देश बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार, 2014 के बाद देश का डिफेंस प्रोडक्शन करीब चार गुना बढ़ चुका है। यह बदलाव भारत की बढ़ती सैन्य ताकत के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी मजबूत होती पकड़ को भी दिखाता है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग
पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार का फोकस अब विदेशी निर्भरता कम करने के साथ-साथ देश में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक और उपकरण तैयार करने पर है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत तेजी से एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा साझेदार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इसका असर रक्षा निर्यात में भी दिखाई दे रहा है।
दो डिफेंस कॉरिडोर में ₹70,000 करोड़ का निवेश
भारत के रक्षा विनिर्माण को नई गति देने के लिए बनाए गए दो डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में करीब ₹70,000 करोड़ का निवेश किया जा चुका है। इन कॉरिडोर का उद्देश्य देश में रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ रही है, बल्कि रोजगार और नई तकनीक के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
दुनिया क्यों देख रही है भारत की ओर?
भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता ऐसे समय में सामने आ रही है, जब दुनिया कई क्षेत्रों में भरोसेमंद सप्लाई चेन और रणनीतिक साझेदारों की तलाश कर रही है।
भारत की बड़ी घरेलू जरूरत, मजबूत औद्योगिक आधार और तेजी से विकसित होती रक्षा तकनीक उसे वैश्विक रक्षा बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना रही है।
2014 के बाद रक्षा बजट, उत्पादन, आत्मनिर्भरता और निर्यात में हुई वृद्धि अब भारत की बदलती तस्वीर की कहानी कह रही है।
भारत का अगला लक्ष्य क्या?
रक्षा क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षा अब सिर्फ आत्मनिर्भर बनने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य है कि भारत रक्षा उत्पादन का बड़ा वैश्विक केंद्र बने और भारतीय कंपनियां दुनिया के अलग-अलग देशों की जरूरतों को पूरा करें।